विकसित भारत संकल्प यात्रा में कृषक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड का ले जा रहे हैं लाभ।

विकसित भारत संकल्प यात्रा अंतर्गत गरियाबंद जिले के विकासखण्ड फिंगेश्वर के ग्राम सेम्हरतरा एवं पतोरा मे महासमुंद लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद श्री चुन्नीलाल साहू जी, के मुख्य आतिथ्य एवं राजिम विधानसभा के माननीय विधायक श्री रोहित साहू जी, के अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

सांसद महोदय द्वारा केन्द्रीय योजनाओं का विस्तृत समीक्षा किया गया साथ ही उनके द्वारा कृषकों को केन्द्रीय योजनाओं का लाभ लेने हेतु प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के माध्यम से कृषको से सहमति प्राप्त कर ग्राम सेम्हरतरा के कृषक श्री धिरेन्द्र साहू के 2 एकड़ में लगाए गए चना फसल, श्री मंशाराम साहू के 1 एकड़ में चना फसल तथा श्री दिनेश साहू के 1.25 एकड़ चना फसल में ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया छिड़काव का प्रदर्शन किया गया।

ड्रोन की उपयोगिता देखकर सभी किसान व ग्रामीण उत्साहित हुए। नेशनल फर्टिलाईजर लिमिटेड के सौजन्य से राज्य शासन द्वारा जिले में एक ड्रोन आबंटित किया गया है जिसे जिले के प्रत्येक विकासखंडो मे प्रदर्शन किया जा रहा है। ड्रोन से नैनो यूरिया, नैनो डी.ए.पी., सुक्ष्म पोषक तत्व, कीटनाशक आदि का छिड़काव पारंपरिक विधियों की तुलना में अधिक सुरक्षित है। यह हवा में प्रदूषण को कम करता है साथ ही मृदा एवं पर्यावरण के लिये सुरक्षित है।

ड्रोन से रसायनों का छिड़काव सामान रूप से होता है, इससे फसलों को उर्वरक व दवाई की समान मात्रा मिलती है। इससे फसलों की वृद्धि और पैदावार में सुधार होने के साथ-साथ समय की बचत होती है तथा लागत कम लगती है। कार्यकम को संबोधित करते हुए माननीय विधायक श्री रोहित साहू द्वारा शासन की योजनाओं का लाभ लेने तथा दूसरे व्यक्तियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने हेतु विभागों को निर्देशित किया गया।

कार्यकम में जिला पंचायत सदस्य श्री चंद्रशेखर साहू, ग्राम पंचायत सेम्हरतरा के संरपंच श्री सुन्दर लाल साहू, जनप्रतिनिधिगण, कृषकगण एवं विभागीय अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे। विकसित भारत संकल्प यात्रा अंतर्गत आयोजित होने वाले समस्त कार्यक्रमों में कृषि विभाग द्वारा कृषकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के नवीन पंजीयन एवं त्रुटि सुधार तथा किसान केडिट कार्ड का लाभ दिया जा रहा है।

कृषकों से अपील है कि वंचित कृषक इन कार्यक्रमों में उपस्थित होकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि व किसान केडिट कार्ड योजना मे पंजीयन कराकर अधिक से अधिक लाभ उठाए। इस हेतु आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका तथा बैंक खाता विवरण के साथ क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क करें।

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, फिंगेश्वर के छात्रों ने ग्रामीणों को खाद्य परिरक्षण को लेकर किया जागरूक

कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र फिंगेश्वर के अधिष्ठाता डॉ. एन. खरे के मार्गदर्शन एवं रावे समन्वयक डॉ. लेखराम वर्मा, सह समन्वयक डॉ नीता मिश्रा सब्जी विज्ञान विभाग से डॉ. ओमेश ठाकुर व फलविज्ञान से वैज्ञानिक डॉ. कुंतल सत्कार के मार्गदर्शन में बी. एस. सी. (कृषि) चतुर्थ वर्ष के छात्र छात्राओं द्वारा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव(RAWE) कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित ग्राम बोरिद में घर पर जैम एवं टूटी फ्रूटी बनाने का प्रशिक्षण ग्रामीणों को दिया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीणों के घर में उपस्थित चीजों जैसे फल आदि से सरल तरीके से जैम और टूटी फ्रूटी बनाना सिखाया गया साथ ही फलों एवं सब्जियों के परिरक्षण के बारे में बताया गया । यह प्रशिक्षण कार्यक्रम हॉर्टिकल्चर एक्टिविटी के तहत किया गया ।

दिनांक 06/10/2023 को गांव के श्री शिव प्रसाद साहू के घर में जैम बनाने का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें ग्रामीण महिलाएं पुरूष शामिल हुए थे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्र छात्राओं द्वारा सेब का जैम बनाकर ग्रामीणों को सिखाया गया कि कैसे वे अपने घर में रखे फलों का उपयोग कर मूल्य संवर्धित वस्तुएं बना सकते हैं और इसे अपना इनकम का जरिया बना सकते हैं, कम खर्च में एक अच्छा सा उत्पाद तैयार किया जा सकता हैं। फलों की कटाई के बाद खराब होने से बचाया जा सकता है तथा लंबे समय तक उपयोग किया जा सके इसके लिए विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं की जानकारी ग्रामीणों को उपलब्ध कराई गई। जैम बनाने के बाद सभी किसानों के साथ साथ स्थानीय बच्चो ने भी जैम का स्वाद लिया जो किसानों और बच्चों को बेहद पसंद आया।

इसके पश्चात दिनांक 09/10/2023 को ग्रामीण श्रीमती जानकी बाई रात्रे के घर में ग्रामजनों की उपस्थिति में पपीते से टूटी फ्रूटी बनाने का प्रशिक्षण देने का कार्य किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को ग्राम वासियों का सहयोग प्राप्त हुआ, और ग्रामवासी इन चीजों को जानने के लिए काफी उत्साहित हुए । ग्रामवासी ने भी खाद्य परिरक्षण के पुरानी तकनीकियों एवं तरकीबों को साझा किया । इस कार्यक्रम में कृषि चतुर्थ वर्ष के कुलदीप, प्रज्ञा, यश, भूपेंद्र, पंकज, फलेश्वर सहित सभी छात्र छात्राएं शामिल हुए।

कृषि स्थाई समिति की बैठक में की गई विभागीय कार्यो की समीक्षा।

आज दिनांक 29/ 8 /2023 को श्री जगदीश साहू सभापति कृषि स्थाई समिति फिंगेश्वर के अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन कृत्रिम गर्भाधान केंद्र राजिम में किया गया।

उक्त बैठक में उद्यान विभाग पशुपालन विभाग एवं कृषि विभाग के विभागीय कार्यों की समीक्षा की गई। उक्त बैठक में श्री जगदीश साहू जी ने विभाग के समस्त अधिकारी कर्मचारियों को क्षेत्र में योजनाओं के प्रचार प्रसार कर अंचल के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने हेतु निर्देशित किया।

समीक्षा बैठक में जनपद सदस्य श्री नरेंद्र चेलक श्री दीपक साहू एवं उद्यान विभाग से युगल किशोर साहू पशुपालन विभाग से श्री के एस पटेल एवं कृषि विभाग से श्री बी आर साहू श्री खिलेश्वर साहू एवं हरिशंकर समेर उपस्थित थे।

धान में पत्ती लपेटक कीट लगे तो ये करे उपाय

पत्ती लपेटक कीट

धान की फसल में ये कीट तेजी से अपना पांव पसारते है। इस कीट के प्रकोप वाले खेतों में धान की फसल की पत्तियां गोल-गोल हो रही हैं। पत्तियों के इस गोल भाग में ही कीट निवास करते हैं तथा अपना प्रजजन करते हैं। यह कीट पत्तियों के क्लोरोफार्म (हरे रंग) को खुरच-खुरच कर खाने लगता है जिससे पौधों की भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित होती है और पौधे कमजोर हो जाते हैं।जिससे उत्पादन में काफी प्रभाव पड़ता है। आज की कड़ी में डॉ. गजेंन्द्र चन्द्राकर (वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक) बताएंगे कि किस प्रकार इस कीट का प्रबंधन किया जा सकता है।

धान के पत्ता लपेटक प्रबंधन

ईटीएल: वानस्पतिक अवस्था में 10% पत्ती की क्षति और 5% पत्ती के झड़ने का फूल पर नुकसान

1.धान लगाने के 37 वे , 44 वे और 51वे दिनों में तीन बार ट्राइकोडर्मा चिलोनिस @ 5 सीसी (1,00,000 / हेक्टेयर) रिलीज़ करें ।

अत्यधिक नाइट्रोजन वाले उर्वरकों से बचें

1.NSKE 5% या कार्बेरिल 50 WP 1 Kg या क्लोरपायरीफॉस 20 EC 1250 मिली / हे। का छिड़काव करें

निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक को स्प्रे करें|

1.फोसलोन 35 ईसी 1500 मिली / हे

2.क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 1250 मिली / हे

3.कार्बेरिल 50 WP 1.0 किग्रा / हे

ऐसफेट 75% एसपी 666-1000 मिली / हे

4.अज़ादिराच्तीन 0.03% 1000 मिली / हे

5.कार्बोसल्फान 6% जी 16.7 किग्रा / हे

6.कार्टाफीड्रोक्लोराइड 50% एसपी 1000 ग्राम / हे

7.क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 18.5% एससी 150 ग्राम / हेक्टेयर

8.क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 0.4% जी 10 किग्रा / हे

9.Dichlorvos 76% SC 627 मिली / हे

10.फिप्रोनिल 80% डब्ल्यूजी 50-62.5 ग्राम / हेक्टेयर

11.फ्लुबेंडियामाइड 39.35% एम / एम एससी 50 ग्राम / हेक्टेयर

12.ट्रायजोफॉस 40% ईसी 625-1250 मिली / हे

13फॉस्फामिडॉन 40% SL 1250 मिली / हे

13.फ्लुबेंडियामाइड 20% डब्ल्यूजी 125-250 ग्राम / हे

14.थियामेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी 100 किग्रा / हे

15. Emamectin Benzoate 1.5% + fipronil 3.5%SC 20 ml प्रति पंप या 500 ml प्रति हेक्टेयर

16. Thiamethoxam12.6%SC + Lamdacyhalothrin 9.5% SC

6-8 ml प्रति पंप या 150 से 200 ml प्रति हेक्टेयर

साभार

डॉ. गजेंद्र चन्द्राकर(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक)श्री होमेश साहू राजकुमारी सिदार रिसर्च स्कॉलर कीट विज्ञान
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालयरायपुर छत्तीसगढ़

कृषि महाविद्यालय के छात्रों द्वारा मनाया गया ग्राम बोरिद में गाजर घास जागरूकता अभियान

गाजर घांस खरपतवार

पूरे भारत देश में 16 से 22 अगस्त तक गाजर घांस जागरूकता अभियान चलाया गया कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र फिंगेश्वर (गरियाबंद) के चतुर्थ वर्ष के छात्राओं द्वारा ग्रामीण ग्रामीण कृषि अनुभव कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम बोरिद में गाजर घास जागरूकता अभियान, कार्यक्रम आयोजित किया गया ।

यह कार्यक्रम महाविद्यालय के प्रोफेसर डा. रवि गुप्ता (कृषि विस्तार विभाग) के मार्गदर्शन से आयोजित किया गया

जिसमें चतुर्थ वर्ष के छात्रा कुलदीप कुमार साहू के द्वारा प्रेजेन्टेशन के माध्यम से गाजर घास की पहचान, इतिहास एवं प्रबंधन के बारे में बताया गया ।

कृषकों को गाजर घांस के प्रबंधन के बारे में बताते कृषि महाविद्यालय फिंगेश्वर् के छात्र


गौरतलब है कि गाजर घास खरपतवार के रूप में एक गंभीर समस्या है, जिससे न केवल फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि इससे फसलों की लागत में भी वृद्धि होती है। इस खरपतवार के साथ निपटने के तरीकों को जानकर इस समस्या को कम किया जा सकता है।

गाजर घास का बढ़ना मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, और पर्यावरण के लिए नकरात्मक प्रभाव डालता है। इसका प्रकोप खाद्यान्न फसलों, सब्जियों, और उद्यानों में भी हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता में भी कमी हो रही है। इसके अत्यधिक फैलने के कारण, यह उपयोगी वनस्पतियों को भी नष्ट कर देता है, जिससे जैव विविधता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

जैविक और यांत्रिकी विधियाँ: गाजर घास को प्रबंधित करने के लिए जैविक और यांत्रिकी विधियाँ का संयोजन किया जा सकता है। इसमें गाजर घास को नियंत्रित करने के लिए जाइगोग्राम बाइकोलोराटा के साथ-साथ जीवित शेष बची जैव उपायोग किया जा सकता है।

जाइगोग्राम बाइकोलोराटा


गाजर घास के ऊपर 20 प्रतिशत साधारण नमक का घोल बनाकर छिड़काव करें। हर्बीसाइड जैसे शाकनाशी रसायनों में ग्लाईफोसेट, 2, 4-डी, मेट्रीब्युजिन, एट्राजीन, सिमेजिन, एलाक्लोर और डाइयूरान आदि प्रमुख हैं। मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाईकोलोराटा) जो इस खरपतवार को बहुत मजे से खाता है, इसके ऊपर छोड़ देना चाहिए।

साथ ही भूपेन्द्र कुमार द्वारा बताया कि घास से मानव एवं पशुओं को होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया 1 इस कार्यक्रम में चतुर्थ वर्ष के समस्त छात्र गजेन्द्र कुमार, फलेश्वर साह, युवराज साहू, यश, महेश पटेल, प्रग्या एवं योगिता सिन्हा उपस्थित रहें।

कृषि उद्यमिता विकास एवम प्रशिक्षण केंद्र का आज हुआ शुभारंभ


खरखरा नर्सरी विकासखण्ड छुरा में जिले के सभी किसान भाईयों के लिए श्री आकाश छिकारा (आईएएस) कलेक्टर गरियाबंद द्वारा ” कृषि उद्यमिता विकास सहप्रशिक्षण केंद्र” का शुभारंभ किया गया।

साथ में किसानों को समन्वित खेती अपनाने लिए अपील किये है, इस प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त करके कृषि के साथ साथ उद्यानिकी मछली पालन,पशुपालन, आदि इंटरप्राइजेस को अपनाकर किसान अपनी आय में बड़ोतरी कर सकते है।संदीप भोई उपसंचालक कृषि ने उपस्थित किसानो को संबोधन में बताया की कृषि एवम सम्बद्ध विभागो बागवानी,पशुपालन , मछली पालन, इत्यादि के उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण एवम क्षमता विकास कर किसानों का उद्यमिता विकसित करने के उद्देश्य से “कृषि उद्यमिता विकास एवम प्रशिक्षण केंद्र ” का शुभारंभ दिनांक 19.08.2023 को शासकीय उद्यान रोपणी खरखरा विकसखंड छुरा में किया जा रहा है ।

केंद्र में जिले के जलवायु एवम मौसमीय उपयोक्तता के आधार पर उन्नत तकनीकों एवम नवाचार जैसे नर्सरी उत्पादन प्रबंधन तकनीकी ,हाईटेक सब्जी उत्पादन ईकाई,फल उत्पादन प्रसंस्करण तकनीकी ,मशरूम उत्पादन,मधुमक्खी पालन,लाख उत्पादन,काली मिर्च उत्पादन, दुग्ध उत्पादन,खरगोश पालन, बतख, कुक्कुट सह मत्स्य पालन, मत्स्य स्पॉन उत्पादन इत्यादि का जीवंत प्रदर्शन लगाया जाएगा तथा किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर कौशल विकास किया जायेगा ।

विभागीय योजनाओ के प्रदर्शन एवम प्रशिक्षण का यथा संभव आयोजन ” कृषि उद्यमिता विकास एवम प्रशिक्षण केंद्र ” किया जाकर संचालित किया जायेगा।उक्त गतिविधियों के संचालन एवम प्रबंधन का संपूर्ण दायित्व संबधित विभाग का होगा। अपने आपको उद्यमी के रूप में विकसित कर सकते है।

कार्यक्रम में जिला अधिकारी,रमेश निषाद सहायक संचालक कृषि,मिथलेश देवांगन सहायक संचालक उद्यान, आर.एन.शर्मा सहायक संचालक पशुपालन,श्रीमती मधु खाखा सहायक संचालक मत्स्य, कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. ईशु साहू विषय वस्तु विशेषज्ञ उद्यान, डॉ. शालू अब्राहम विषय वस्तु विशेषज्ञ शस्य विज्ञान,कृषि विभाग छुरा से एन.के.भोई वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, पुष्पलता ध्रुव विषय वस्तु विशेषज्ञ , रोमन ठाकुर, राकेश कुमार आर्य, संजय सरोज केवंट ,अलका ध्रुव, संजय बघेल,शिवकुमार साहू,आदि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी बीरबल कमार, लंकेश्वर यादव,सुनील साहू, शशिकांत साहू,उद्यान विस्तार अधिकारी एवम कौशल साहू आदि उद्यान विभाग से उपस्थित हुए है।

तना छेदक-किसानों का सर का दर्द है ये कीट

तना छेदक (Stem borer)

वैज्ञानिक नाम : स्सिर्पोफागा इन्सर्तुलास (Scirpophaga incertulas)

पहचान:

इस कीट की चार विभिन्न स्पीसीज़ में पीला तना छेदक सबसे मुख्य है । इस कीट का युवा पतंगा होता है, जिसके अग्र पंख पीले से होते है । मादा पतंगे के पीले अग्रपंखो पर केन्द्र में एक प्रकार का विशेष काला निशान होता है जबकि नर के अग्रपंख के अंतिम किनारे पर ८ से ९ छोटे भूरे निशान होते हैं । पंतगा सांय ७ से ९ बजे मादा से मिलता है । मादा पत्तियों के शिखर पर समूह में अंडे रखती है और उन्हें पांडु रंग की रोऐं दार पपड़ी से ढक देती है । एक मादा १०० से २०० ऐसे अंडे समूह जनती है, प्रत्येक समूह में ५० से ८० अंडे होते है । अंडों से ५ से ८ दिन में लारवी बाहर आती है । पूर्ण विकसित लारवी का रंग पाडुं पीला तथा उसका सिर नारंगी पीला होता है । यह २५.मि.मी. लम्बाई तक होती है एवं पर्णच्छद से होती हुई, पत्ती में घुस जाती है । यहाँ लारवी १६ से २७ दिन में ६ बाद चोला बदलती है तथा प्यूपा बन जाती है । यह १६ मि.मी. लम्बा तथा २.५ मि.मी. चौड़ा होता है, जो ९ से १२ दिन बाद युवा पतंगे के रूप में विकसित हो जाता है ।

क्षति की प्रकृति:

पौधे की वानस्पतिक अवस्था में लारवी पर्णपच्छद में छेद बनाती है और अंदर जाकर पौधे को क्षति पहुंचाती है । क्षतिग्रस्त क्षेत्र सफेद सा हो जाता है । बिना खुली पत्ती भूरी सी होकर सूख जाती हैं, जिसे डेड हर्ट (मृत केन्द्र) कहते है । चित्र में इसी प्रकार के मृतकेन्द्र फसल के साथ दिखाए गये है । संक्रमित पौधों में से सामान्य पुष्प गुच्छ के स्थान पर सफेद बालियां निकलती हैं, जिनमें दाने नही बनते । चित्र में धान के खेत में ऐसी बालियाँ दर्शायी गई हैं ।

➡️ क्षति के लक्षण -डॉ गजेंद्र चन्द्राकर(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ के अनुुसार

▪️पत्ती की नोक के पास भूरे रंग के अंडे की समूह पायी जाती है

▪️धान के मुख्य तना और कन्सा के मध्य भाग केंद्रीय शूट में कैटरपिलर बोर करते है जिससे केंद्रीय शूट सूखने लगते है जिसे *डेड हार्ट* कहते है।

▪️पौधों के मध्य भाग को आसानी से हाथ से खींचा जा सकता है।

धान की फसल में तना छेदक कीट का ऐसे करे प्रबंधन:

🔹 परंपरागत क्रियाये

▪️रोपाई से पहले नर्सरी थरहा के फोक ऊपरी भान का मुंडन  करने से रोपित क्षेत्रों से अंडों  का वहन बहुत कम हो जाता है

▪️छोटे कद और कम विकास अवधि वाले धान की किस्मों को लगाना चाहिए

▪️प्रतिरोधी   किस्में /सहनशील.  किस्में- रत्ना, सस्यश्री, विकास, भागीरथी,पंत धान

🔹 यांत्रिक क्रियाएं

▪️रोगग्रस्त / कीट से संक्रमित पौधों के हिस्सों को निकालना (नष्ट करना)

▪️प्रकाश प्रपंच को प्रति हेक्टेयर 1 की  दर  से उपयोग करे

▪️फेरोमोन प्रपंच @ 10 प्रति एकड़ का उपयोग करे

🔹 जैविक नियंत्रण

▪️जैव नियंत्रक के रूप में ट्राइकोग्रामा मित्र कीट 20 हजार अंडे के गुच्छे  5 से 6 अंडे के गुच्छे tricho card को धान की पत्तियों में चिपकाना 


🔹 रासायनिक नियंत्रण

क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल18.5% SC @ 60 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

▪️कार्टप हाइड्रोक्लोराइड  4% जी 4 किग्रा / एकड़

▪️एसिफेट 75%  SP  -350 ग्राम / एकड़

▪️क्लोरपायरीफॉस 20% ईसी  500 मी  ली  / एकड़

▪️फिप्रोनिल 5% एससी  500 मी ली / एकड़

▪️फिप्रोनिल 80% डब्लूजी 50- 4  किग्रा / एकड़

▪️फ्लूबेंडामाइड 20%  WG -60 ग्राम / एकड़

▪️थियाक्लोप्रिड 21.7% एससी 200 ग्राम / एकड़

▪️थायोमेथोक्साम 25% डब्लूजी 40 ग्राम / एकड़

▪️ट्रायाजोफोस 40% ईसी – 400  मिली / एकड़ 

▪️फॉसालोन 35 ईसी – 700 मिली / एकड़

▪️ऐसीफेट 75% एसपी  – 750 ग्राम / एकड़

▪️कार्बोफ्यूरान 3 G  – 13 किग्रा / एकड़

▪️कार्बोसल्फान 6%  – 7 किग्रा / एकड़

साभार डॉ गजेंद्र चन्द्राकर
(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक) इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़एवम राजकुमारी सिदार MSc (Ag) Ento final year IGKV

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. पाटिल और छात्र – विमर्श

छात्रनेता प्रदेश सचिव (कृषि ) NSUI छत्तीसगढ़ सुजीत सुमेर

कम शब्दों में ज्यादा भाव प्रकट करना क्लिष्ट कार्य है किंतु फिर भी आज उल्लेख करता हु।
डॉ संजय कुमार पाटिल जिन्होंने इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के बेहतर विकास छात्रों की प्रगति उन्नति और विश्वविद्यालय को विश्व पटल के साथ हाथ से हाथ मिलाकर आगे बढ़ने के लिए एक बेहतर कार्य किया।
हालांकि अभी वर्तमान में इनके कार्यों को आगे बढ़ाकर छात्रों की काबिलियत बढाकर कृषि छात्रों को चेंज एजेंट के रूप में ब्रांडिंग कर स्थापित करने की नितांत आवश्यकता है। आज विश्वविद्यालय का इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिसर में अनुसंधान के साथ निर्माण की छात्र हितैषी नवाचरित प्रकल्पों को छत्तीसगढ़ के हितों में डॉ पाटिल की उद्यमिता ने साकार किया।डॉ पाटिल सदैव छात्रों के चहेते रहे छात्रों के उत्कंठा एवं छात्रों की बातों को बहुत ही सुलझे एवम कूटनीतिक तरीके से हल करते जिससे छात्रवर्ग कभी नाराज़ नही हुआ। पाटिल सर के 1 दशक के कार्यकाल को एक छात्र होने के नाते काफी करीब से देख पाया है। कही न कही मेरे छात्रहितों के कार्यो की शुरुआत को आरम्भ करने में उनका भी अहम योगदान है । उनकी एक बात मेरे आज भी जहन में है जब मैं स्नातक के दूसरे वर्ष में था और एक अकादमिक दुर्घटना के परिपेक्ष्य में सर से भावावेश में मुलाकात हुई ख़ैर इस घटना का जिक्र न किया जाए तो बेहतर है, उस दौरान मेरी स्थिति को देखकर डॉ पाटिल सर ने कहा था सुजीत पत्र लिखने की आजादी सबको है इस घटना की मैं जाँच करवाता हु कभी किसी से डरना नही है पत्र लिखा करो आपके पत्र से ही बदलाव  की दिशा तय होती है यह आपका संवैधानिक अधिकार है। इस घटना से लेकर आज तक मैंने डॉ पाटिल सर से बात नही की लेकिन छात्रहितों के मुद्दे से सदैव पत्रों के माध्यम से अवगत कराते गया। एक अकादमिक से जुड़ा व्यक्ति सदैव अकादमिक से ही जुड़ा होता है लेकिन राजनीतिक सरोकारों को अकादमिक हितों में लाना भी उनकी जिम्मेदारी होती है।
यह विदित है कि मनोभंगिमाओ से लोग कई अनैतिक और अनीति के अर्थ का उद्भाव करते है। डॉ पाटिल सर के कार्यकाल में कुछ ऐसा हुआ कि उनकी प्रशासनिक दक्षता से विषय आबद्धताओ को विशेष श्रेयस्कर प्राप्त करने में कठिनाई हुई लेकिन समीपस्थ के परिप्रेक्ष्य में ज्यादा कहना अतिशय होगा।
प्राध्यापकों की उन्नति छात्रों की उन्नति नही है बल्कि छात्रों की उन्नति प्राध्यापकों की उन्नति है। इस आधार शिला को वरन हर राज्यो के विश्वविद्यालयों को आत्मसात करना चाहिए। आज लगभग आत्ममुग्धी में लिप्त अधिकांशतः शिक्षाविद यदि छात्रों के शैक्षिक,अनुसंधान ,नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक तथा मानव मूल्य वर्धन पर व्यवहारिक कार्य करे तो हर एक छात्र की भविष्य हित सुनिश्चित है।अभाव के प्रभाव से जो प्रादुर्भाव प्रकट हो वह सदैव सकारात्मक होना चाहिए । आज एक आदर्शिता के द्योतक डॉ पाटिल 10 वर्षों की सेवा के पश्चात यदि छात्रों के बीच मे अपनी योग्यता का प्रवाह प्रवाहित करते है तो यह छात्रों के लिए बहुत ही सार्थक होगा। डॉ पाटिल सर का यह निजी मत हो सकता है लेकिन छात्रों के बीच मे आज उनकी कार्यशैली को परिणित करने के लिए बहुत श्रेष्ठ समय है।मैं सदैव अन्तःकरण से डॉ पाटिल सर का सम्मान करता हु। आज उनका शुभ जन्मदिन है मैं ईश्वर से उनके हितों में मंगलकारी कामना करता हु और आशा करता हूं डॉ पाटिल सर कृषिशिक्षा जगत को और छत्तीसगढ़ राज्य के हितों के संवर्धन में छात्रजगत को विशेष लाभ प्रदान करने के लिए उद्द्यत रहेंगे।

(यह लेखक के निजी विचार है )
सुजीत सुमेर
पीएचडी स्कॉलर कृषि मौसम विज्ञान विभाग
NSUI प्रदेश सचिव (कृषि) छत्तीसगढ़

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