जैविक तरीको को अपनाकर किसान बचा सकते है अपनी फसल को कीटो से।

भारत में हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य देश को खाद्यान्न मामले में आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन इस बात की आशंका किसी को नहीं थी कि कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल न सिर्फ खेतों को बंजर बना देगा, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाएगा। क्योंकि देश के ज्यादातर
किसान परंपरागत कृषि से दूर होते जा रहे हैं। किसानों ने अधिक लालच के कारण कीटनाशकों के अत्यधिक व अनावश्यक मात्रा में प्रयोग से कृषि भूमि को बंजर बना दिया है। सरकार ने भी किसानों के हित में परंपरागत कृषि की ओर लौटने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना का शुभारंभ कर दिया है।


पक्षियों से कीट नियंत्रण :

मित्र पक्षियोंको आकर्षित करने के लिए खेत की मेड़ोंपर लकड़ी की खप्पचियां लगाएं। इस पर
बैठकर पक्षी आकर्षित होकर फसलों में लगे कीड़ों एवं लटों को चुन-चुन कर खा जाते हैं। मित्र पक्षी जैसे मैना, बटेर, बगुले आदि


परभक्षी एवं परजीवी कीटों से
नियंत्रण :

किसान लाभदायक मित्र कीट एवं जीवों का संरक्षण कर व इनको प्रोत्साहन देकर तथा इनके लार्वा का खेत में प्रयोग करके हानिकारक कीटो का बिना किसी कीटनाशकों के नियंत्रण किया जा सकता है। इनमें मेन्टिस, लेडी बर्ड बीटल, कोटेसिया, क्राइसोपरला, ट्राईकोग्रामा कीट, मकड़ी, झींगुर, चींटियां, ततैया, रोवर-फ्लाईं, रिडूविड, मड-वेस्प, ड्रेगन-फ्लाई एवं सिरफिड-पलाई आदि शामिल है।

नीम दवा :

नीम के सभी भागों में कीटनाशी तत्व
पाया जाता है। 5 किलो नीम की निबोली को अच्छी तरह सुखाकर बारीक कूट लें और 5 लीटर पानीमें इस पाउडर को 12 घंटे तक भिगो दें। इस घोलको मोटे कपड़े से छान लें। इस घोल में 100 लीटर पानी प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें। इनका प्रयोग कपास, तिलहन व टमाटर को हानि पहुंचाने वाले माइ, सफेद मक्खी, फुदका, कटुआ सुंडी तथा फल छेदक सुंडी पर प्रभावी होता है। अरण्डी व नीम से दीमक नियंत्रण: बुआई के एक माह पूर्व अरंडी की खली 500 किलो प्रति हेक्टेयर उपयोग कर या नीम तेल
4 लीटर सिंचाई के पानी के साथ देकर दीमक को नष्ट किया जा सकता है।


ट्राईकोग्रामा कीट :

यह बहुत छोटा अंड परजीवी कीट है जो पतंगों और तितलियों के अंडों में अपने अंडे देती है। ट्राईकोग्रामा परजीवी प्रकृति में पाया जाता है।

फेरोमोन ट्रेप:

फसल में 8 से 10 फेरोमोन ट्रेप एक-डेढ़ फीट ऊपर लगाएं। ये ट्रेप नर- मादा अथवा दोनों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं।


लाइट ट्रेप/प्रकाश पाश:

कीटों को प्रकाश की ओर आकर्षित करने के लिएखेत की मेड़ों पर प्रकाश पाश. या बल्ब या पैट्रोमेक्स लेप लगाकर जलाएं। उसके नीचे केरोसिन मिले 5 प्रतिशत पानी की परात रखें, ताकि रोशनी पर आकर्षित कीट मिट्टी के तेल मिले पानी में गिरकर नष्ट हो जाएं। इसे बारिश के मौसम में सितंबर अंत तक जारी रखें।

ट्रेपफसल या रक्षक फसल

कीड़ेअंडे देने व खाने के लिए कुछ पौधे/फसल
(हजारा आदि) की तरफ आकर्षित होते हैं। इन्हीं फसल/पौधों को ट्रेप फसल कहते हैं। टमाटर कीफसल के चारों तरफ गेंदे के पौधे लगाने से हरी सुंडी पहले गेंदे के पौधों पर दिखाई देती है। तुरंत गेंदे पर कीटनाशक का छिड़काव कर हरी सूंडी को खत्म करें।


एनपीवी छिड़कावः

हरी सुंडी (लट) के नियंत्रण केलिए एक हेक्टेयर में 250 एल.ई. एन.पी.वी
(न्यूक्लियर पॉली हैड्रोसिस वायरस) का घोल
छिड़कने से लटें 3-4 दिन में पौधों पर उल्टी
लटक कर मर जाती है। किसान ऐसी लटों को इकट्ठाकरके खुद एनपीवी तैयार कर सकता है।
बीटी छिड़कावः तरल बीटी (बेसीलस थूरिन्जेन्सिस)एक लीटर को 500-600 लीटर पानी मेंघोलकर प्रति हैक्टेयर छिड़काव करने से
फली छेदक लटें 1-3 दिन में मरने लग
जाती हैं।


ट्राइकोडर्मा :

ट्राइकोडर्माकल्चर 6 से 10 ग्राम प्रति किलो
बीज को उपचारित कर बोने से कवकजनित रोगों से फसलोंको बचाया जा सकता है।

Published by कृषि कनेक्शन

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