सामुदायिक बीजोत्पादन – किसान भाई स्वयं अपना बीज तैयार कर हो सकते है “आत्म निर्भर”

बीज किसी फैक्ट्री में नही किसान के खेत मे उगता है।

कृषि कार्य करने हेतु सबसे अहम बात होती है बीजो का चुनाव।आज का किसान हर वर्ष निजी संस्थाओं से सहकारी समितियों से खरीदकर खेती करता है जिससे खेती करने की लागत बढ़ जाती है अपितु सोचनीय विषय यह है कि बीज किसी कारखाने में नही किसान के खेत मे ही तैयार होता है।आज की कड़ी में डॉ गजेंन्द्र चन्द्राकर वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक बताएंगे कि किसान भाई कैसे अपना बीज स्वयं ही बना सकते है।
बीज बनाने से पहले हम जानेंगे कि बीज होता क्या है।
“पसुसुप्त भ्रूण” को बीज कहते है।
यदि इसे विस्तार से बताए तो ऐसा परिपक्व सुसुप्त भ्रूण जिसमें उसके प्रारंभिक पोषण के लिए भोजन सामग्री बीज पत्रों या एंडोस्पर्म के रूप में आवरण में हो और अनुकुल दशाओं में एक स्वस्थ पौधे को जन्म दे, बीज कहलाता है।

  1. केंद्रीय बीज (nucleus seed) – केंद्रीय बीज प्रजनक (वैज्ञानिक) द्वारा स्वयं तैयार किया जाता है। जो अनुवांशिक रूप से 100% शुद्ध होता है।
  2. प्रजनक बीज (breeder seed) – केंद्रीय बीज से प्रजनक बीज स्वयं प्रजनक (वैज्ञानिक) के देख रेख में तैयार किया जाता है। यह केन्द्रीय बीज की संतति होती है। यह बीज भौतिक एवं अनुवांशिक रूप से 100 शुद्ध होता है। प्रजनक बीज के बोरे में पीले रंग का टैग लगा होता है।
  3. आधार बीज (foundation seed) – इसका उत्पादन बीज प्रमाणीकरण संस्था की निगरानी में होता है। यह प्रजनक बीज की संतति होती है। आधार बीज के थैली पर प्रमाणीकरण संस्था का सफ़ेद रंग का टैग लगा होता है।
  4. प्रमाणित बीज (certified seed) – यह बीज आधार बीज से तैयार किया जाता है। अतः यह आधार बीज की संतति होती है। प्रमाणित बीज उत्पादन बीज प्रमाणीकरण संस्था की देख रेख में किया जाता है। यह भी भौतिक एवं अनुवांशिक रूप से शुद्ध होता है। इसके बोरे/थैली पर प्रमाणीकरण संस्था का नीले रंग का टैग लगा होता है। परगित फसलों में बीज दो पीढ़ी तक मानी किया जा सकता है।

प्रमाणित बीज का महत्व
प्रमाणित बीज अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध होते है, तथा इन पौधों में एकरूपता, गुणों में समानता एवं पकने की अवधि एक पाई जाती है।
बीज की अंकुरण क्षमता मानकों के अनुरूप होती है।
बीज की जीवन क्षमता उत्तम होती है। तथा पुष्ट भरा एवं चमकदार होता है।
प्रमाणित बीज के उपयोग से सामान्य बीज की उपेक्षा उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है।

जानिए क्या है प्रमाणित बीज और किन मानकों से गुजरकर किसानों तक पहुंचता है।

ऐसा बीज जो भारत सरकार द्वारा निर्धारित भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों की पालन करते हुए राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा प्रमाणित किये जाते हैं, वे प्रमाणित बीज कहलाते हैं।

केन्द्रक बीज, प्रजनक बीज, लेबल बीज, टेस्ट स्टाक बीज प्रमाणित नहीं होते बल्कि सभी वैधानिक रूप से लेबल बीज होते है।

प्रमाणित बीज की गुणवत्ता
प्रमाणित बीज तैयार करने में बीज की गुणवत्ता को निम्न प्रकार सुनिश्चित किया जाता हैं

1.अनुवांशिक शुद्धता – अनुवांशिक शुद्धता का अर्थ हैं, किस्म विकास के समय जनक प्रजनक द्वारा बताये गुणों वाले पौधों के अलावा एनी प्रजाति के बीज, खरपतवार, रोगी पौधों की छटाई करना और गुणों में बदलाव को रोकना हैं,यह कार्य बीज प्रमाणीकरण अधिकारी और बीज उत्पादकों द्वारा किया जाता है। अनुवांशिक शुद्धता निम्न क़दमों से सुनश्चित की जाती है –

2. कृषक का चुनाव – बीज उत्पादन में ऐसे कृषक का चुनाव करते हैं। जो कृषि ज्ञान और बीज उत्पादन की पृष्ठ भूमि का हो और ऐसा न हो कि कृषक की ना समझी के कारन बीज में किसी स्तर पर मिलावट हो जाएँ।
किस्म का चुनाव – प्रमाणित बीज तैयार करते समय ऐसी किस्म का चुनाव करते हैं जिसमें अधिकतम उत्पादन देने एवं अधिकतम रोगरोधी क्षमता हो। किस्म में स्थायित्व एक रूपता और विलक्षणता के लक्षण हो।

3. बीज का स्त्रोत – प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए आधार बीज या प्रजनक बीज प्रयोग करते है और वह भी किसी विश्वविद्यालय या प्रमाणीकरण संस्था द्वारा तैयार किया गया हो। राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था प्रमाणित बीज उत्पादन का कार्यक्रम स्वीकार करते समय और निरक्षण के समय स्त्रोत की जांच करती है।
4. छटाईं – कृषक खड़ी फसल में दूसरी जाती के पौधे, खरपतवार, रोगी पौधों की छटाईं करता है। और बीज प्रमाणीकरण अधिकारी खड़ी फसल का निरिक्षण करता है और मानक की पुष्टि न होने पर निरस्त भी कर देता है।

5. बीज निकालना – बीज निकालने और गोदाम में लाने तक ध्यान रखा जाता है। ताकि बीज में किसी प्रकार मिलावट न हो। थ्रेशिंग की मशीन साफ़ हो और गोदामों में प्रत्येक किस्म का बीज अलग लगाते हैं, बोरियां (थैले) उलटे करके साफ़ भरे जाते हैं और हर बैग पर किस्म का नाम लिखा होता है।

6.आइसोलेशन – किस्मों में अवांछित परागण से मूल लक्षणों में परिवर्तन न आये उसके लिए प्रत्येक किस्म को निर्धारित आइसोलेशन (पृथकीकरण) अंतर पर लगाते है। अत: शुद्धता बनी रहती है जैसे बाजरा में 200 मी., अरहर में 250 मी.,भिन्डी में 250 मी. धान में 3 मी.आदि।

7. ग्रो आउट टेस्ट – बीज तैयार होने पर वितरण से पहले भी पुन: बीज को उगा कर देखा जाता है और चैक किया जाता है की किस्म के गुणों में कोई परिवर्तन तो नहीं आया है और शुद्ध बीज ही अगले सीजन में बीजाई के लिए वितरित किया जाता है।

किसान ससमुदायिक बीजोत्पादन कैसे करे।


एक क्लस्टर में लगभग 10 हेक्टेयर के किसानों का चयन करें।
■एक ही किस्म का धान बीज सभी किसान भाई साथ मे लगाए
■अनुवांशिक शुद्धता हेतु आइसोलेशन डिस्टेंस का ध्यान रखे।
■धान में निकलने वाली प्रथम बाली जो पककर तैयार होती है उसे अलग कर लेंवे।
■छत्तीसगढ़ में इसे “माई बीजहा” कहा जाता है यह बीज सबसे स्वस्थ बीज होता है इस बीज को किसान आने वाले समय मे बो सकते है

सावधानियां
ग्रो आउट टेस्ट:-
किसान भाई बीज बोने से पूर्व छोटी सी जगह पर एक मुट्ठी बीज उगाकर स्वयं अंकुरण की जांच कर लेंवे। ततपश्चात ही खेत पर बुवाई करे

नोट-हाइब्रिड बीजो से बीजोत्पादन नही किया जा सकता

साभार

डॉ गजेंन्द्र चन्द्राकर(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक)इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालयरायपुर छत्तीसगढ़

तकनीक प्रचारकर्ता

“हम कृषकों तक तकनीक पहुंचाते हैं”

Published by कृषि कनेक्शन

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