
किसान भाइयों आज हमे घन जीवामृत से खेती करने की बहुत ही आवश्यकता है। क्योंकि हरितक्रांति के बाद से ही भारतीय खेती मे जिस प्रकार रसायनिक उर्वरको का आंख बंद कर के बड़ी भारी मात्रा मे प्रयोग हुआ है उसने हमारी भूमि की संरचना ही बदल कर रख दी है। आज बहुत ही तेजी से खेती योग्य भूमि बंजर भूमि में बदलती जा रही है। और लाखों करोड़ रुपया किसानों का रासायनिक उर्वरकों पर खर्च हो रहा है। खेतो मे लगातार रासायनिक उर्वको के प्रयोग से फसल की पैदावार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
अधिक खर्च और कम उत्पादन के कारण ही किसान भाई कर्ज से दबे हुए है। साथ ही हमारे खाने से होकर ये जहर हमारे स्वास्थ्य को भी खराब कर रहा है।
इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैविक खेती के अंतर्गत किसानों के पास उपलब्ध संसाधनों से ही खेती करके अधिक पैदावार लेना है। जैसे रासायनिक उर्वरकों की जगह अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग करना। जिनमे कम्पोस्ट खाद, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत,गोमूत्र आदि का प्रयोग करना है।
इस लेख में हम घन जीवामृत के बारे में जानकारी दे रहे है। जिसे किसान भाई कम लागत मे अपने ही घर पर बनाकर खेतो मे प्रयोग करके अधिक लाभ ले सकते है।
घन जीवामृत (एक एकड़ हेतु)
घनजीवामृत में सूक्ष्मजीव सुषुप्त अवस्था में रहते हैं। खेत में डालने पर ये जीव सक्रिय होकर फसल को पोषकतत्व उपलब्ध करवाते हैं।
■100 किलोग्राम गाय का गोबर
■ 1 किलोग्राम गुड/फलों की चटनी
■2 किलोग्राम बेसन (चना, उड़द, अरहर, मूंग)
■50 ग्राम मेड़ या जंगल की मिट्टी
■1 लीटर गौमूत्र
बनाने की विधि
■सर्वप्रथम 100 किलोग्राम गाय के गोबर को किसी पक्के फर्श व पोलीथीन पर फैलाएं।
■एक पात्र में बाद गुड या फलों की चटनी, बेसन एवं मेड़ या जंगल कीमिट्टी डालकर उसमे गौमूत्र मिलाये।
■घोल बनाकर घोल को गोबर के ऊपर छिडक कर फॉवड़ा से अच्छी तरह से मिला दें।
■इस सामग्री को 48 घंटे तक किसी छायादार स्थान पर एकत्र कर या थापीया बनाकर जूट के बोरे से ढक दें।
■48 घंटे बाद उसको छाए पर सुखाकर चूर्ण बनाकर भंडारण करें।
भण्डारण
इस घन जीवामृत का भण्डारण करके 6 माह तक प्रयोग कर सकते हैं। गोबर ताजा ही लें या फिर अधिकतम सात दिन तक पुराना गोबर का प्रयोग करें।गोमूत्र किसी धातु के बर्तन में न रखें।
उपयोग
एक बार खेत जुताई के बाद घनजीवामृत का छिड़काव कर खेत तैयार करें।
श्री रोहित साहू जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ के वीडियो से सीखे की कैसे बनाते है घन-जीवामृत
साभार
साकेत
सतत कृषि ज्ञान एवम शशक्तिकरण संस्था
वीडियो साभार
श्री रोहित साहू जिला दुर्ग छत्तीसगढ़

तकनीक प्रचारक
