आधुनिक खेती आज काफी मंहगी हो गयी है किसान भाइयों ने फसलों का उत्पादन तो बढ़ा लिया है परंतु साथ ही साथ मंहगे कीटनाशकों का प्रयोग कर कृषि लागत को भी काफी बढ़ा लिया है।हमारा उधेश्य यह है कि कृषि लागत कम हो जाये और किसान भाइयों को अधिक उत्पादन प्राप्त हो।
आज की कड़ी में डॉ गजेंन्द्र चन्द्राकर वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक बताएंगे ट्राइकोग्रामा कार्ड के बारे जिसके प्रयोग से फसलों में लगने वाले तना छेदक, पत्ती लपेटक कीटो का प्रबंधन किया जा सकता है। आइए तो जानते है आखिर है क्या ये ” ट्राइकोग्रामा कार्ड”

“ट्राइकोग्रामा कार्ड”
ट्राइकोग्रामा परजीवी कार्ड की कीमत काफी कम होती है, जिसकी प्रति कार्ड कीमत 150 रुपए तक होती है जिसमे चार स्ट्रिप होती हैं और हर स्ट्रिप में 18 से 20 हजार अंडे होते हैं। कीट नियंत्रण की यह विधि काफी कारगर होने के साथ-साथ पर्यावरण के भी बहुत अनुकूल होती है। इस ट्राइकोग्रामा विधि किसान की लागत तो कम होती ही है, साथ ही साथ खेतों में पड़ने वाले रासायनिक जहर से भी मुक्ति दिलाती है।
ट्राइकोग्रामा कार्ड में होते है मित्र कीट ततैया के अंडे
यह गहरे रंग का अत्यन्त छोटा ततैया कीट होता है जो
कि लेपिडोप्टेरा कुल के लगभग 200 प्रकार के हानिकारक धान, सूर्यमुखी, कपास, फूलों और सब्जियों में हानिकारक तना छेदक,फल भेदक, पत्ती मोड़क कीटों का जैविक विधि से विनाश करता है।

नियंत्रण विधि
मादा ट्राईकोग्रामा फसल को क्षति पहुंचाने वाले कीटों के अण्डे में अपने अण्डे देती है। बाद में इन अण्डों से छोटे डिम्ब (लार्वा) निकलते हैं, जो कि हानिकारक कीटों के अण्डों के भागों को खा जाते हैं। अंत में इन पोषित अण्डों से व्यस्क ट्राईकोग्रामा ततैया निकलता है। एक ट्राईकोग्रामा ततैया हानिकारक कीटों के 100
कीटों को मार देता है।
इस ततैया की लम्बाई 0.4 से 0.7मिमी. होती है तथा इसका जीवनचक्र निम्न प्रकार है:
■अंडा देने की अवधि 16-24घण्टे
■लार्वा अवधि 2-3 दिन
■प्यूपा पूर्व अवधि 2 दिन
■प्यूपा अवधि 2-3दिन
■कुल अवधि 9-12 दिन

प्रयोग विधि
जैसे ही आपको हानिकारक कीटों के अण्डे दिखाई दें, तुरन्त ही ट्राईकोग्रामा कार्ड को छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़ लें, साथ ही इन टुकड़ों की संख्या को बराबर खेत में विभिन्न वर्गों में विभक्त कर लें।खेत के प्रत्येक वर्ग के बीचों बीच पौधे की पत्तियों को जोड़ कर इन टुकड़ों को लगा देना चाहिए।


ट्राईकोग्रामा कार्ड से व्यस्क कीट प्रायः सुबह के समय निकलते हैं और स्वतः ही पूरे खेत में फैलकर हानिकारक कीटों के अण्डों को खोजकर नष्ट कर देते हैं। परिणामों से पता चला है कि एक ट्राईकोग्रामा अपने चारों ओर लगभग 100 मीटर के घेरे में शत्रु कीट के अण्डों को खाकर नष्ट कर देता है।
यहां है उपलब्ध
जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़
ये भी है मित्रकीट




साभार
डॉ गजेंन्द्र चन्द्राकर
(वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक)
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़
