नॉलेज:-छत्तीसगढ़ में अवर्षा कभी नहीं होगी,अगर सूखा भी पड़ा तो आंशिक ही पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ में मानसून बादलों के रास्ते पर है। मध्य उत्तर भारत के लिए बादल हमेशा छत्तीसगढ़ के रास्ते से ही होकर गुजरते है और बरसते भी है, इतना हो सकता है कि किसी जिले में ज्यादा वर्षा तो किसी जिले में कम यही नहीं करीब 4 महीनों के मानसून जैसे छत्तीसगढ़ में धान की खेती के लिए ही है। जून में हर खेत मे पानी चाहिए।सितंबर अक्टूबर में कुछ खेतो में पानी की जरूरत होती है। जून से लेकर अक्टूबर तक मानसून यह जरूरत पूरी करता है।

खेती को जितना पानी चाहिए, मानसून दे जाता है, जब जरूरत, तब तक रहता है छत्तीसगढ़ में बारिश का सीजन

जानिए क्या कहते है विशेषज्ञ


कृषि विभाग के अनुसार मानसून के दौरान राज्य
में औसत 1250 मिमी बारिश होती है। कृषि
विभाग के ही पिछले एक दशक में बारिश का औसत
1219 मिमी के आसपास है। यानी हर साल औसत
के आसपास बारिश हो रही है।

इतना पानी खरीफ फसल के लिए पर्याप्त है। इंदिरा गांधी कृषि विवि के कृषि मौसम विभाग के एचओडी डा. जी के दास के अनुसार मानसून की बारिश जून से सितंबर तक होती है। छत्तीसगढ़ में 90 से 100 दिन में पकने वाले धान लिए जाते हैं। जून के पहले पखवाड़े तक एक-दो अच्छी बारिश चाहिए। इससे बुआई, रोपा इत्यादि का काम हो जाता है।

इसके बाद 20 से 25दिन ज्यादा बारिश की जरूरत नहीं होती। यानी 15 जुलाई के आसपास खेतों को पानी चाहिए होता है, तब छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी ताकत से बरसता है। सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त में होती है। देर से बुआई करने वाले कुछ किसानों को अगस्त के बाद सितंबर में भी बारिश की जरूरत होती है। राज्य में मानसून की विदाई 15 अक्टूबर के बाद ही होती है। तब तक खेतों को पर्याप्त पानी मिल चुका होता है।

खाड़ी में ज्यादा प्रेशर न भी हो तो छत्तीसगढ़ की जरूरत लायक बारिश मिल ही जाती है

छत्तीसगढ़ के दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। बंगाल की खाड़ी में कुछ भी हलचल हो या चक्रवात उठे तो समुद्र से नमी आनी जरूरी है। समुद्र से नजदीक होने के कारण चार-पांच दक्षिण राज्यों के बाद मानसून सीधे छत्तीसगढ़ पहुंच जाता है। राज्य से होकर ही मानसून शेष भारत तक पहुंचता है। खाड़ी में ज्यादा प्रेशर न भी हो तो छत्तीसगढ़ राज्य को जरूरत लायक बारिश मिल ही जाती है।

इसलिए राज्य में बहुत कम हालात बनते हैं कि बारिश की कमी के कारण फसल चौपट हुई हो। लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एच पी चंद्रा के अनुसार राज्य में आमतौर पर औसत के आसपास और कभी-कभी उससे अधिक भी वर्षा हो जाती है।

मानसून अच्छा रहने पर पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होती है। वर्षा का असमान वितरण होने पर ही कुछ कुछ साल राज्य के कुछ जिलों में कम पानी गिरता है, लेकिन ऐसा कोई जिला नहीं है जहां बारिश ही नहीं हो। इस साल अप्रैल-मई के बाद जून में भी मौसम काफी अच्छा है। उम्मीद है कि मानसून में राज्य में अच्छी बारिश होगी।

साभार

डॉ.एचपी चंद्रा
विशेषज्ञ मौसम विज्ञान केंद्र

डॉ.जीके दास

विभागाध्यक्षकृषि मौसम विज्ञान विभाग
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर

Published by कृषि कनेक्शन

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