
प्रायः छत्तीसगढ़ के किसान भाई बीजो का उपचार किये बिना ही बीजो की बुवाई कर देते है जिससे बाद में बीज जनित रोगों से किसान भाई परेशान रहते है एवं अंधाधुन्ध रसायनिक दवाओं का उपयोग इन रोगों के उपचार में करते है।जिसके कारण उत्पादन भी काफी प्रभावित होता है और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को आमंत्रित करते है। ऐसे में जरूरत है कुछ ऐसे उत्पादों की जो बीज जनित रोगों में प्रभावशाली हो। उनमें से एक है “UPAJ”
जानिए कैसे उपयोग में लाया जा सकता है “UPAJ
कैसे करे UPAJ से बीजोपचार
धान के बीजो का बीजोपचार करने के लिए धान के बीजो को प्लास्टिक के शीट में डालकर फैला लेंवे। प्रति किलो बीज के लिए “UPAJ” 5 ग्राम की मात्रा में लेकर उसमें इतना पानी मिलावे की पेस्ट बना जाए पेस्ट को बीजो पर छिड़ककर पेस्ट के साथ बीजो को रगड़ने से काले रंग की परत बीजो पर चढ़ जाएगी अगर बीजो पर “UPAJ” पाउडर स्वरूप में दिख रहा हो तो उसमें थोड़ा और पानी मिलाकर रगड़ने की आवश्यकता है। कब बीजो को छायादार जगह पर सूखा लेंवे। और अब बुवाई के लिए प्रयोग करे।
खाद में मिलाकर भी प्रयोग कर सकते है।
पहली बार खाद डालते समय खाद में 500 ग्राम UPAJ प्रति एकड़ के हिसाब से डालने पर 8 से 10 दिन में स्प्ष्ट रूप से प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाई देने लगता है।
ये काम करता है” “UPAJ”
1.मिटटी को उपजाऊ बना देता है, मिटटी में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ा देता है।
2. मिटटी में केंचुए काम करना सुरु कर देते है।
3.फसल को मिटटी से होनेवाले सभी रोगों से मुक्ति दिलाता है।
4. “UPAJ” का उपयोग फसल की प्रारंभिक अवस्था अथवा आधार खाद के साथ मिलाकर उपयोग करने से खाद की उपयोगिता को बढाता है। इसके क्षरण को रोककर पौधों के लिए भरपूर भोजन उपलब्ध करता है ।
5. यह सम्पूर्ण जाइम का कार्य करता है | इसके उपयोग के पश्चात् अलग के किसी प्रकार के जाइम की आवश्यकता नहीं है |
“UPAJ” उपयोग से लाभ :-
1. पोधे के भोजन ग्रहण करने वाली जड़ो का विकास करता है तथा पौधे की बढवार में सहायक।
2. पौधे में संतुलित नाइट्रोजन ग्रहण तथा भूमि में उपस्थित नाइट्रोजन की उपयोगिता को बढाता है ।
3. भूमि में उपस्थित पोटाश, कैल्शियम तथा फास्फोरस को पौधे के लिए उपलब्ध कराता है ताकि पौधे, जड़ो के माध्यमसे आसानी से ग्रहण कर सके ।
4. पौधे में संतुलित पोषक तत्वों को भोजन के रूप में उपलब्ध कराता है तथा विपरीत परिस्थिति अथवा ओवर दोस होने पर इसके विपरीत प्रभाव को कम करता है ।
5. पौधे में प्राकृतिक रूप से रोग तथा कीट प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।
6. भूमि की उर्वरा शक्ति को बढाता है तथा खाद एवं अन्य क्षरण को कम करता है और जल धारण क्षमता को बढाता है ।
7. अंकुरण क्षमता को बढाता है तथा भूमि के पी.एच. को न्यूट्रल करता है।
“UPAJ” के उपयोग की विधि :-
1. लगभग सभी प्रकार के जैविक एवं रासायनिक खाद के साथ मिलाकर उपयोग किया जा सकता है |
2. सिस्टमिक कीटनाशक एवं कैल्शियम नाइट्रेट के साथ न मिलाये |
3. सभी घुलनशील खाद के साथ मिलाकर भी उपयोगकिया जा सकता है |
UPAJ की मात्रा :-
1. आधार खाद के साथ मिलाकर डालने के लिए 500 ग्राम प्रति एकड़ |
2. स्प्रे के व्दारा : 250 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के साथ मिलाकर
3. ड्रीप के व्दारा : 250 ग्राम प्रत्येक बार घुलनशील खाद के साथ मिलाकर देना उचित है |
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