
कम शब्दों में ज्यादा भाव प्रकट करना क्लिष्ट कार्य है किंतु फिर भी आज उल्लेख करता हु।
डॉ संजय कुमार पाटिल जिन्होंने इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के बेहतर विकास छात्रों की प्रगति उन्नति और विश्वविद्यालय को विश्व पटल के साथ हाथ से हाथ मिलाकर आगे बढ़ने के लिए एक बेहतर कार्य किया।
हालांकि अभी वर्तमान में इनके कार्यों को आगे बढ़ाकर छात्रों की काबिलियत बढाकर कृषि छात्रों को चेंज एजेंट के रूप में ब्रांडिंग कर स्थापित करने की नितांत आवश्यकता है। आज विश्वविद्यालय का इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिसर में अनुसंधान के साथ निर्माण की छात्र हितैषी नवाचरित प्रकल्पों को छत्तीसगढ़ के हितों में डॉ पाटिल की उद्यमिता ने साकार किया।डॉ पाटिल सदैव छात्रों के चहेते रहे छात्रों के उत्कंठा एवं छात्रों की बातों को बहुत ही सुलझे एवम कूटनीतिक तरीके से हल करते जिससे छात्रवर्ग कभी नाराज़ नही हुआ। पाटिल सर के 1 दशक के कार्यकाल को एक छात्र होने के नाते काफी करीब से देख पाया है। कही न कही मेरे छात्रहितों के कार्यो की शुरुआत को आरम्भ करने में उनका भी अहम योगदान है । उनकी एक बात मेरे आज भी जहन में है जब मैं स्नातक के दूसरे वर्ष में था और एक अकादमिक दुर्घटना के परिपेक्ष्य में सर से भावावेश में मुलाकात हुई ख़ैर इस घटना का जिक्र न किया जाए तो बेहतर है, उस दौरान मेरी स्थिति को देखकर डॉ पाटिल सर ने कहा था सुजीत पत्र लिखने की आजादी सबको है इस घटना की मैं जाँच करवाता हु कभी किसी से डरना नही है पत्र लिखा करो आपके पत्र से ही बदलाव की दिशा तय होती है यह आपका संवैधानिक अधिकार है। इस घटना से लेकर आज तक मैंने डॉ पाटिल सर से बात नही की लेकिन छात्रहितों के मुद्दे से सदैव पत्रों के माध्यम से अवगत कराते गया। एक अकादमिक से जुड़ा व्यक्ति सदैव अकादमिक से ही जुड़ा होता है लेकिन राजनीतिक सरोकारों को अकादमिक हितों में लाना भी उनकी जिम्मेदारी होती है।
यह विदित है कि मनोभंगिमाओ से लोग कई अनैतिक और अनीति के अर्थ का उद्भाव करते है। डॉ पाटिल सर के कार्यकाल में कुछ ऐसा हुआ कि उनकी प्रशासनिक दक्षता से विषय आबद्धताओ को विशेष श्रेयस्कर प्राप्त करने में कठिनाई हुई लेकिन समीपस्थ के परिप्रेक्ष्य में ज्यादा कहना अतिशय होगा।
प्राध्यापकों की उन्नति छात्रों की उन्नति नही है बल्कि छात्रों की उन्नति प्राध्यापकों की उन्नति है। इस आधार शिला को वरन हर राज्यो के विश्वविद्यालयों को आत्मसात करना चाहिए। आज लगभग आत्ममुग्धी में लिप्त अधिकांशतः शिक्षाविद यदि छात्रों के शैक्षिक,अनुसंधान ,नैतिक, सामाजिक और राजनीतिक तथा मानव मूल्य वर्धन पर व्यवहारिक कार्य करे तो हर एक छात्र की भविष्य हित सुनिश्चित है।अभाव के प्रभाव से जो प्रादुर्भाव प्रकट हो वह सदैव सकारात्मक होना चाहिए । आज एक आदर्शिता के द्योतक डॉ पाटिल 10 वर्षों की सेवा के पश्चात यदि छात्रों के बीच मे अपनी योग्यता का प्रवाह प्रवाहित करते है तो यह छात्रों के लिए बहुत ही सार्थक होगा। डॉ पाटिल सर का यह निजी मत हो सकता है लेकिन छात्रों के बीच मे आज उनकी कार्यशैली को परिणित करने के लिए बहुत श्रेष्ठ समय है।मैं सदैव अन्तःकरण से डॉ पाटिल सर का सम्मान करता हु। आज उनका शुभ जन्मदिन है मैं ईश्वर से उनके हितों में मंगलकारी कामना करता हु और आशा करता हूं डॉ पाटिल सर कृषिशिक्षा जगत को और छत्तीसगढ़ राज्य के हितों के संवर्धन में छात्रजगत को विशेष लाभ प्रदान करने के लिए उद्द्यत रहेंगे।
(यह लेखक के निजी विचार है )
सुजीत सुमेर
पीएचडी स्कॉलर कृषि मौसम विज्ञान विभाग
NSUI प्रदेश सचिव (कृषि) छत्तीसगढ़