हरसिंगार (Nyctanthes arbor – tristis)

नंदकिशोर प्रजापति
हरसिंगार एक पुष्प देने वाला वृक्ष है।इसे हमारे ग्रामीण अंचल में सियाली/सियारी कहकर पुकारते है,इसकी टहनियों से टोकरी बनाने का काम वर्षो से होता आया हैं। कुछ लोग इसे पारिजात भी कहते है, पर इसमे कई मतभेद भी हैं। हारसिंगार को शेफाली, शिउली आदि नामो से भी जाना जाता है।

हरसिंगार का पेड़ 10 से 15 फीट तक ऊँचा हो जाता है।हारसिंगार पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। इसकी सबसे बड़ी पहचान है सफ़ेद फूल और केसरिया डंडी होती है। इसके फूल रात में खिलते है और सुबह सब झड जाते है।
हारसिंगार अत्यंत लाभकारी ओषधि हैं, जो अनेक रोगों को दूर करने में सहायक है।
साइटिका का सफल इलाज
एक पैर मे पंजे से लेकर कमर तक दर्द होना साइटिका या रिंगण बाय कहलाता है। प्रायः पैर के पंजे से लेकर कूल्हे तक दर्द होता है जो लगातार होता रहता है। मुख्य लक्षण यह है कि दर्द केवल एक पैर मे होता है,दर्द इतना अधिक होता है कि रोगी सो भी नहीं पाता।
हारसिंगार के 250 ग्राम कोमल पत्ते को कटे फटे न हों तोड़ लाएँ पत्ते को धो कर थोड़ा सा कूट ले या पीस ले।बहुत अधिक बारीक पीसने कि जरूरत नहीं है। लगभग एक लीटर पानी में धीमी आंच पर उबाले.. जब 700 ग्राम पानी बचे तब इसे छान कर बोतल में भर लीजिये,,व प्रतिदिन आधा कप खाली पेट लीजिये।कुछ ही दिनों में साइटिका में आराम मिल जाएगा, ध्यान रखे बसन्त ऋतु में इसके पत्रों का असर कुछ कम हो जाता हैं।
(नोट -काढ़े से 15 मिनट पहले और 1 घंटा बाद तक ठंडा पानी न पीए,दही लस्सी और आचार न खाएं..)